चिड़िया चहक रही थी डाली,
कोयल सुन रही थी प्याली।
भोर की किरणों संग उड़ जाती,
सांझ ढले फिर घर आ जाती।
पर अब उसकी दुनिया बदली,
कहीं नहीं वो शाखें पत्तियाँ।
कैसे बनेगा उसका घोंसला,
कहाँ सजेगी उसकी बत्तियाँ?
संभालो इसको, बचा लो इसको,
छोटी चिड़िया का है संदेश।
प्रकृति बचाकर ही रहेगा,
हम सबका सुंदर परिवेश।